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Delhi Highcourt ने अरविंद केजरीवाल को जमानत देने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई, कहा ‘टिप्पणी पूरी तरह अनुचित’

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल अभी जेल में ही रहेंगे, क्योंकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें उन्होंने एक निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें अब समाप्त कर दी गई आबकारी नीति से जुड़े धन शोधन मामले में जमानत दी गई थी।

न्यायमूर्ति सुधीर कुमार जैन की अवकाश पीठ ने कहा, “आवेदन स्वीकार किया जाता है और आरोपित आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाती है।” उच्च न्यायालय ने निचली अदालत की इस टिप्पणी की आलोचना की कि ईडी द्वारा प्रस्तुत की गई भारी मात्रा में सामग्री पर विचार नहीं किया जा सकता है, तथा इस तर्क को “पूरी तरह अनुचित” माना।

न्यायालय ने कहा, “निचली अदालत द्वारा यह टिप्पणी कि भारी मात्रा में सामग्री पर विचार नहीं किया जा सकता है, पूरी तरह अनुचित है तथा यह दर्शाता है कि निचली अदालत ने सामग्री पर अपना ध्यान नहीं लगाया है।” उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 45 की दोहरी शर्तों पर अवकाश न्यायाधीश द्वारा पर्याप्त रूप से विचार-विमर्श नहीं किया गया था। विवाद का एक मुख्य बिंदु निचली अदालत द्वारा अपने आदेश के पैराग्राफ 27 में ईडी द्वारा कथित दुर्भावनापूर्ण कार्यों का उल्लेख था।

न्यायमूर्ति जैन ने कहा, “लेकिन इस न्यायालय की राय है कि इस न्यायालय की समन्वय पीठ ने कहा है कि ED की ओर से कोई दुर्भावनापूर्ण कार्य नहीं किया गया था।” उन्होंने कहा कि निचली अदालत को इसके विपरीत निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए था। वित्तीय अपराध से निपटने वाली एजेंसी ने 21 मार्च को केजरीवाल को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए 1 जून तक अंतरिम जमानत दे दी। अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद 2 जून को केजरीवाल ने तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया।

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